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आज अक्षय तृतीया के पर्व पर ऋषिकेश के इस मंदिर में 108 परिक्रमा करने से मिलता है बद्रीनाथ धाम की यात्रा का शुभफल..

जानिए क्यों मनाया जाता है "अक्षय तृतीया "का शुभ पर्व..

AVP Uk डेस्क।
 
ऋषिकेश। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। अक्षय तृतीया का काफी महत्व माना जाता है। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया के शुभ पर्व पर लोग अपने नए कार्य शुरू करते हैं और सोने चांदी की खरीदारी भी दिन शुभ मानी जाती है।
जानिए क्यों मनाया जाता है “अक्षय तृतीया “का शुभ पर्व..
मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया अपने नाम के अनुरूप ही शुभ फल प्रदान करने वाली तिथि है। ये हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। स्वयं सिद्ध तिथि पर सारे मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, उद्योग का आरंभ करना अत्यंत शुभ फलदाई माना जाता है। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का अत्यंत महत्व है  यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। आज अक्षय तृतीया है। मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। जिसके लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती है। अक्षय तृतीया का फल अक्षय यानी कि कभी न मिटने वाला होता है। अक्षय तृतीया पर दान पुण्य का भी अत्यंत महत्व है। इस दिन किए गए दान पुण्य का कई गुना फल प्राप्त होता है। आज हम जानेंगे अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है और उसका क्या महत्व है। जिसके बारे में हमें गढ़वाल के सुप्रसिद्ध ज्योतिष भानु कंडियाल ने बताया कि अक्षय तृतीया मनाने के चार कारण है।
अक्षय तृतीया मनाने के चार कारण :
अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम ने महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका देवी के घर जन्म लिया था। भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। अक्षय तृतीया पर भगवान परशुराम की पूजा करने का भी विधान है।
महाभारत लिखना शुरू किया :
सनातन धर्म में महाभारत को पांचवे वेद के रूप में माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने अक्षय तृतीया के दिन से ही महाभारत लिखना शुरू किया था। महाभारत में ही श्रीमद्भागवत गीता समाहित है और अक्षय तृतीया के दिन गीता के 18वें अध्याय का पाठ करना शुभ माना जाता है।
मां गंगा का अवतरण :
अक्षय तृतीया के दिन ही स्वर्ग से पृथ्वी पर माता गंगा अवतरित हुई थी। माता गंगा को पृथ्वी पर अवतरित कराने के लिए राजा भागीरथ में हजारों वर्ष तक तपस्या की थी। मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर गंगा में डुबकी लगाने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
माता अन्नपूर्णा का जन्मदिन :
अक्षय तृतीया के दिन माता अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी मनाया जाता है। माता अन्नपूर्णा की पूजा करने से भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन गरीबों को भोजन कराने का विधान है। साथ ही देश भर में भंडारे भी कराए जाते हैं।
अक्षय तृतीया का महत्व :
अक्षय तृतीया के दिन जरूरतमंदों को दान पुण्य करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन एक गरीब को घर बुलाकर आदर पूर्वक भोजन अवश्य कराना चाहिए। ये काम गृहस्थ लोग अवश्य करें इससे धन धान्य में अक्षय वृद्धि होती है। अपनी धन संपत्ति में कई गुना इजाफा पाने के लिए अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अक्षय तृतीया पर दान करना चाहिए।

ऐसी मान्यता है कि ऋषिकेश में स्तिथ पौराणिक भगवान भरत l जी के मंदिर की 108 परिक्रमा करने से भगवान बदरीनाथ के दर्शनों का जितना पुण्य प्राप्त होता है। खास बात यह है कि भरत भगवान की मूर्ति भी उसी शालीग्राम पत्थर से बनी है, जिससे बद्रीनाथ भगवान की मूर्ति बनाई गई है। इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन ही भरत भगवान के चरणों के दर्शन करने का सौभाग्य श्रद्धालुओं को प्राप्त होता है। अक्षय तृतीया के दिन से ही चार धाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो जाता है। आज के दिन ही यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट भी खोले जाते हैं। इस मौके पर सोना खरीदना भी लाभकारी बताया गया है।

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